Beawar News
badshah mela beawar 2024
ब्यावर का बादशाह मेला ब्यावर में रंग बिरंगी संस्कृति का प्रतीक है, ब्यावर बादशाह मेला गुलाल से ही शुरू होता है और गुलाल से ही मेले का समापन होता है,
राजस्थान के शहर ब्यावर में प्रतिवर्ष बादशाह अकबर की याद में इस मेला का आयोजन होता है जहां पर मेले में बादशाह की सवारी निकाली जाती है जिसके आगे बीरबल नृत्य करता हुआ चलता है और पर लोगों की भीड़ साथ चलती है |
बादशाह मेले का इतिहास
यह मेला भारत वर्ष की मूल संस्कृति की झलक लिये हुऐ आज की भैतिक दुनियां में मानव मन व मस्तिष्क को प्रफुल्लित करने का एक अनोखा प्रयास है ।
इस मेले को ब्यावर शहर के संस्थापक कर्नल डिक्सन ने सन् 1851 में अग्रोहा, शेखावाटी, बेरी, भिवानी से आये अग्रवाल फतेहपुरिया के सहयोग से पीरामल टोड़रमल की दूकान से पाॅंचबत्ती के पास कपड़ा बाजार से आरम्भ किया जो फतेहपुरिया बाजार, अजमेरी दरवाजे से होता हुआ उप-जिला कार्यालय पर उपजिलाधिश द्धारा बादशाह के साथ गुलाल खेलने के पश्चात् रात्रि को करीब 8 बजे समाप्त हो जाता है इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से व आस-पास के इलाकों से हजारो नर-नारी व विदेशी सैलानी आते हैं । चारों और मेले में भारतीय संस्कृति दृष्टिगोचर होती हैं वह सभी जाति, धर्म-सम्प्रदाय के लोगोे के आपसी मेल-मिलाप व गुलाल से परस्पर खेलने व बादशाह के साथ गुलाल से खेलने का आनन्द प्राप्त होता हैं ।
पौराणिक कथानुसार अकबर बादशाह के नवरत्न राजा टोडरमल दवारा जादूई करिश्में से बादशाह को आखेट के वक्त जंगल में आवश्यक उपकरण व मुद्रा उपलब्ध कराये जाने से प्रसन्न होकर बादशाह अकबर ने राजा टोडरमल को चार घण्टे की बादशाहत प्रदान की थी जिसकी याद ताजा रखने के लिये ब्यावर में हर साल होली के त्यौहार पर छारण्डी के अगले दिन हर दिलकश अजीज का बादशाह मेले का त्यौहार मनाया जाता है ।
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