नई दिल्ली: Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की वर्ष 2025 की ताज़ा रिपोर्ट में भारत को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत अब दुनिया में सबसे अधिक रक्षा खर्च करने वाले देशों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। भारत ने अपने रक्षा बजट में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसके बाद देश का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर कई देशों के बीच सैन्य तनाव और सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2025 में भारत और Pakistan के बीच हुए छोटे लेकिन बेहद तीव्र सैन्य संघर्ष के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने, आधुनिक हथियार खरीदने और सेना को नई तकनीकों से लैस करने के लिए सरकार लगातार बड़े फैसले ले रही है। भारत अब केवल पारंपरिक हथियारों पर ही नहीं बल्कि साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, मिसाइल सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य तकनीकों पर भी तेजी से निवेश कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और बदलते वैश्विक हालात के कारण देश का रक्षा बजट लगातार बढ़ सकता है। भारत “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी तेजी से बढ़ावा दे रहा है। सरकार का उद्देश्य विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करके देश में ही आधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण करना है। इसी दिशा में कई नई रक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
SIPRI रिपोर्ट के अनुसार United States अब भी दुनिया का सबसे अधिक रक्षा खर्च करने वाला देश बना हुआ है। हालांकि अमेरिका के सैन्य खर्च में हल्की कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद वह पहले स्थान पर कायम है। दूसरे स्थान पर China है, जिसने 336 अरब डॉलर का रक्षा बजट दर्ज किया है। चीन लगातार 31वें वर्ष अपने सैन्य खर्च में बढ़ोतरी कर रहा है, जिससे एशिया क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
तीसरे स्थान पर Russia है, जिसने यूक्रेन युद्ध और बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण अपने रक्षा बजट में भारी निवेश किया है। वहीं Germany चौथे स्थान पर पहुंच गया है। जर्मनी ने यूरोप में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपने सैन्य खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत — ये पांचों देश मिलकर दुनिया के कुल सैन्य खर्च का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर बड़ी शक्तियां अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करने में जुटी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का रक्षा बजट और बढ़ सकता है, क्योंकि देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहता है। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और आधुनिक युद्ध तकनीकों को देखते हुए भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट: N. S. Bhati | beawarnews.com

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