आज लघु उद्योग भारती, ब्यावर शाखा द्वारा द्वारा माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय खान मंत्री को क्रमशः उपखंड अधिकारी एवं खनिज अभियंता, ब्यावर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया गया |
ज्ञापन में निवेदन किया गया कि दिनांक 03 जनवरी 2022 के गजट नोटिफिकेशन तथा दिनांक 22 अप्रैल 2022 की गाइडलाइन के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा राज्य में स्थापित MSME मिनरल प्रोसेसिंग उद्योग पर ₹25,000/- का वार्षिक शुल्क तथा टी.पी. निर्गमन शुल्क ₹10/- प्रति टी.पी. लगाकर इन उद्योगों को बंद होने की तरफ धकेला जा रहा है । गौरतलब है कि दुर्भाग्य से वर्तमान में मिनरल प्रोसेसिंग उद्योग अत्यंत विषम आर्थिक परिस्थितियों से जूझते हुए बहुत ही कम मार्जिन पर संचालित किए जा रहे हैं ।
पूर्व में दो बार माननीय उच्च न्यायालय जयपुर तथा जोधपुर में सरकार द्वारा ट्रांजिट पास के संबंध में (केस संख्या 494/ 2018 डिविजन बेंच, माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर तथा 1007/2018 डिविजन बेंच, माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर) सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि "टी.पी. व्यवस्था केवल मात्र एक रेग्युलेटरी मैकेनिज्म है, जो कि अवैध खनन तथा अवैध खनिज निर्गमन व परिवहन को रोकने के लिए है । साथ ही यह व्यवस्था पूर्णतया निःशुल्क रहेगी तथा किसी भी मैन्युफैक्चरर प्रोसेसर तथा स्टॉकिस्ट पर ट्रांजिट पास व्यवस्था का किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं पड़ेगा ।"
अब सरकार द्वारा यह शुल्क लगाना माननीय उच्च न्यायालय में सरकार द्वारा लिखित में दिए गए स्वयं के जवाब का उल्लंघन है । विभाग द्वारा शुल्क की वसूली हेतु राज्य में स्थित लगभग सभी मिनरल इकाइयों की SSO ID ब्लॉक कर दी गई है, जिससे इन इकाइयों का व्यापार पूर्णरूपेण ठप हो गया है । अपने व्यापार को क्षणिक रूप से गतिशील रखने हेतु मजबूरीवश कुछ इकाइयों द्वारा यह शुल्क सविरोध जमा भी करवाया गया है ।
इस टी.पी. व्यवस्था को लागू करने के पीछे सरकार की जो मूलभूत भावना अवैध खनन तथा अवैध खनिज निर्गमन व परिवहन को रोकने मात्र की थी, उसे पूर्णतया ध्यान में रखा जाए । इस व्यवस्था को राजस्व उत्पत्ति का साधन नहीं बनाया जाये |
इस अवैधानिक शुल्क का सबसे चिंतनीय पहलू यह भी है कि इस कार्यावाही के फलस्वरूप राजस्थान से गुजरात जाने वाले मिनरल पाउडर की सप्लाई में व्यवधान के कारण वहाँ के टाईल्स निर्माताओं ने राजस्थान के अलावा अन्यत्र प्रदेशों से मिनरल पाउडर की खरीद करना प्रारम्भ कर दिया है, जिससे राजस्थान में उत्पादन की कमी के साथ-साथ राज्य को भी वित्तीय नुकसान हो रहा है |
ज्ञापन के माध्यम से निवेदन किया गया कि सरकारी तंत्र द्वारा 03 जनवरी 2022 के नोटिफिकेशन से पूर्व की जो व्यवस्था लागू थी, उसी व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जाए । अतः टी.पी. व्यवस्था को मिनरल संबंधित लघु उद्योगो पर अवैधानिक वित्तीय भार डालते हुए इन उद्योगों का जीवन समाप्त करने का कुत्सित प्रयास ना कर इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से निरस्त करवाने का निवेदन इस ज्ञापन के माध्यम से किया गया |
ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष सचिन जी नाहर, सचिव विजय जी मेहता, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अजय जी खंडेलवाल, पालक अधिकारी प्रकाश जी अंबुरे सहित सुनील जी इनाणी, पवन जी रायपुरिया, दिनेश जी गुप्ता, जय जी आनंदानी, गगन जी भारद्वाज, आशीष जी झंवर, कैलाश जी मूँदडा, राकेश जी मुथा, श्रीकांत जी बिहाणी, प्रकाश जी इनाणी, अनिकेत जी अंबुरे, शशांक जी बंसल, कमल जी कोठारी, विनोद जी मित्तल, भूपेश जी भंसाली, संदीप जी जैन, प्रशांत जी पाबुवाल, नितिन जी नाहर, अनुज जी जिंदल, प्रवीण जी सिंघल सहित कई उद्यमी उपस्थित रहे |
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