#टॉडगढ़
स्वतंत्रता के समय टाडगढ़ क्षैत्र अजमेर मेंरवाड़ा के नाम से जाना जाता था एवं भारत की संघीय व्यवस्था में C श्रेणी का राज्य था प्रथम आम चुनावो में अजमेर मेरवाड़ा विधान सभा के चुनाव हुये थे बाद में सन् 1956 में अजमेर मेवाड़ा का राजस्थान में विलय कर दिया गया
अजमेर मेरवाड़ा के तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व ने इस विलय का विरोध भी किया था। चाहे कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व रहा हो चाहे तत्कालीन जनसंघ का नेतृत्व सब सबका मानना था कि छोटे राज्य का विकास तीव्रगति से होगा लेकिन तत्कालीन केन्द्र सरकार व राजस्थान सरकार के सामने उनकी नहीं चली एवं अजमेर मेरवाड़ा का राजस्थान मे विलय का दिया गया। बंधुओं तब से अब तक इस क्षेत्र का विकास एक तरह से अवरुद्ध हो गया हो विकास की गति शेष राजस्थान के बनिस्पन बहुत धीमी रही है लगातार क्षेत्र उपेक्ष का शिकार होता रहा है। शिक्षा के क्षैत्र मे यह क्षेत्र स्वतन्त्रता के पूर्व बहुत अग्रिम पंक्ति में था शेष रियासतों से बहुत आगे था लेकिन विलय के पश्चात लगातार पिछड़ता गया राजकीय सेवाओं में अजमेर मेरवाड़ा के समय से आप का प्रतिनिधित्व बन काफी कम हुआ है। हमारा क्षेत्र मूलतः पहाडी क्षेत्र है कर यहाँ कृषि योग्य बड़ी जमीन ने मूलतः नहीं है मूल रूप से यहाँ के लोग पशुपालन एवं अपनी शैक्षणिक योग्यता के कारण राजकीय सेवाओं में एवं शागरिक शौष्ठव व देश भक्ति के जज्बे की वजह से फौज में थे यही इनकी आजिविका का साधन था लेकिन
विलय के पश्चात शेष राजस्थान से पिछड़ता चला गया। यहाँ कोई उद्योग आदि भी स्थापित नहीं हुए न ही शिक्षा संस्थानों की स्थापना समय पर हुई इसलिये हमारा युवा वर्ग को समान अवसर प्राप्त करने हेतु उचित योग्यता प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल सका मेरवाड़ा रेजिमेंट हुआ करती थी जिसमें इस क्षेत्र के जवानों का अच्छा प्रतिनिधित्व होता था लेकिन मेवाड़ा रेजिमेंट समाप्त होने से हमारे जवानों को बहुत क्षति हुई अगर विलय न होता तो स्थानीय सरकार मेरवाड़ा रेजिमेंट हेतु आवाज उठाती। इस क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का समुचित विकास नहीं किया गया अगर यह कार्य होना तो धार्मिक पर्यटन बढ़ता एवं स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होता लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अगर थोड़ा बहुत कार्य हुआ भी तो योजना बह तरीके से नहीं हुआ पहाडी क्षेत्र होने की वजह से इस क्षेत्र के निवासियों का जीवन काफी दूभर हैं लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से इस T S.P. नहीं किया गया न हो ना इस और प्रयास हुआ क्षेत्र में शराब व अन्य नशे की बुराई को जड़ मूल से समाज क तु कोई भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया अरावली पर्वत के पूर्व से पश्चिम की ओर जो कच्ची सड़के शायद स्वतंत्रता से पूर्व बनी थी आज भी जस की तस है अगर उन्हें उचित रूप से किया तो क्षेत्र के विकास में सहयोगी होती '
अजमेर मेरवाड़ा हमारी मांग है कि अजमेर मेरवाड़ा राज्य पुनः राज्य बने एवं राजस्थान सरकार यह प्रस्ताव विधानसभा में पारित करे ।इस कार्य हेतु हम आज मगरा मेरवाडा संघर्ष समिति की स्थापना कर रहे है। जो की वर्तमान मे कार्यरत संगठन मंगरा भालिया विकास संघ का विस्तारीकरण हैं। इस मंच के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है
1. अलग अजमेर मेरवाड़ा राज्य हेतु जन जागरण एवं आंदोलन
2. पर्वतीय क्षेत्र को पूर्ण रूप से सघन वृक्षारोपण कर पर्यावरण को सुरक्षा हेतु प्रयास
3. क्षेत्र के युवकों हेतु हर तरह के शैक्षणिक संस्थानों हेतु प्रयास
A कृषि आधारित B ITI , C सैनिक स्कूल
4.मेरवाड़ा रेजिमेंट हेतु सघन प्रयास
5. क्षेत्र को विशेष T.S.P. वर्ग का दर्जा दिलाने हेतु प्रयास
6.क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास हेतु प्रयास करना
7 अजमेर मेरवाड़ा का पूर्ण रूप से नशामुक्त करने हेतु एवं सघन प्रयास करने हेतु जनजागरण अभियान करना
8. सर्वांगीण विकास हेतु प्रयास
इस अवसर पर मगरा भालिया विकास संघ अध्यक्ष- देवराज जैन, संयोजक तिलोक सिंह बंजारी, नरेन्द्र सिंह बामनहेडा,धर्मेन्द्रसिंह बंजारी, कमल सिंह लबूरी, बसंत सिंह अरनाली आदि मौजूद थे।

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