महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा निकाली गई हल्ला बोल रैली की चर्चा हो रही है।
दरअसल, प्रधानमंत्रियों के परिवार में जन्मे राहुल गाँधी 50 साल के अपने जीवन में कभी किराना स्टोर देखा होगा, ये भी विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता। संभवत: इसी कारण से आटा और तेल के मापन में वे अंतर नहीं कर पाए। दरअसल, आटा ठोस पदार्थ होने के कारण ग्राम और किलोग्राम में मापा जाता है न कि लीटर में। तरल पदार्थों की मापन इकाई लीटर है।
वास्तव में राहुल गाँधी जो स्क्रिप्ट पढ़ कर रैली में बोल रहे थे। हो सकता है कि जिस व्यक्ति ने इस स्क्रिप्ट को लिखी है, उसने इसे ‘किलो’ के बजाय ‘लीटर’ लिख दिया हो। ये भी हो सकता है कि तेल और पेट्रोल की बात करते-करते राहुल गाँधी आटा को भी लीटर में बोल दिए हों और यह उनके जुबान फिसलने के कारण के कारण हुआ हो। खैर जो फिर हुआ है, इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मीम की बाढ़ आ गई है।
नेटिज़न्स ने मज़ाक उड़ाया कि कैसे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और नेता अब आटा लेने के लिए बोतलों के साथ खड़े होंगे, क्योंकि राहुल गाँधी के अनुसार यह अब लीटर में उपलब्ध है।
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